पुलिस ने कहा- ‘माओवादियों की तरह काम करता था विकास दुबे’ 

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लखनऊ, 06 जुलाई – यूपी में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी कुख्यात विकास दुबे ( Vikas Dubey ) के घर से पुलिस ने 15 जिंदा बम, दो किलोग्राम विस्फोटक और छह पिस्तौल बरामद किए हैं। जबरदस्त खूनी मुठभेड़ के एक दिन बाद जब कानपुर के जिला अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने बिकरू गांव में दुबे के घर को ध्वस्त किया, तब वहां से भारी मात्रा में हथियारों के जखीरे का पता चला, जिसे देखकर सबके होश उड़ गए। बिकरू गांव राजधानी लखनऊ से करीब 120 किलोमीटर की दूरी पर है।

कानपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक बीके श्रीवास्तव ने कहा, ‘ शनिवार को हमें एक टिप मिली थी जिसके बाद हमने विकास दुबे के घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान हमें छह पिस्टल, 25 कारतूस और 15 जिंदा बम के साथ दो किलोग्राम विस्फोटक और कच्चा माल बरामद किया। टिप में कहा गया था कि विकास दुबे ने अपने घर में एक बंकर बनाकर रखा है, जहां हथियारों को दीवारों में छुपाकर रखा गया है।’

पुलिस अधीक्षक बीके श्रीवास्तव ने कहा, ‘दुबे का पूरा नेटवर्क नक्सलियों और माओवादियों की तरह काम करता था।’ दुबे के मोबाइल फोन से 20 पुलिस अधिकारियों को सूचीबद्ध किए गए डेटा के बाद उस ‘गहन’ नेटवर्क का कुछ विवरण आज सामने आया। चौबेपुर पुलिस स्टेशन से कम से कम दो पुलिसकर्मी के साथ लगातार संपर्क के सबूत भी मिले। ये वहीं पुलिस चौकी है जहां से दुबे को छापे की चेतावनी देने वाले फोन कथित तौर पर किए गए थे।
विकास खुद को सिर्फ गुनाहों की दुनिया तक सीमित नहीं रखना चाहता था बल्कि उसकी मंशा राजनीति में भी थी।  लगभग सभी दलों के नेताओं के साथ उसका उठना बैठना था। यह बात खुद उसकी मां ने बताई। वह बताती हैं कि विकास 25 साल से राजनीतिक दलों का हिस्सा हैं। विकास 15 साल तक बीएसपी के साथ रहा, 5 साल भाजपा में और 5 साल से समाजवादी पार्टी में था। शायद इसलिए कोई भी दल विकास के खिलाफ खुल कर बोलने में संकोच कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के खुफिया सिस्टम का मुकाबला विकास दुबे की मुखबिरों की फौज से हो रहा है। इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ दुबे के गिरेबान से दूर हैं। पुलिस की दो दर्जन से ज्यादा टीमें 48 घंटों में 100 से ज्यादा जगह छापेमारी कर चुकी हैं लेकिन अब तक खाली हाथ हैं।  सफलता के नाम उनके पास विकास दुबे का एक साथी दया शंकर अग्निहोत्री है।  जिसे पुलिस ने कल्याणपुर से गिरफ्तार किया है। ऐसे में देखना होगा कि पुलिस और विकास के बीच आंख मिचोली का खेल कब तक चलता है।

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