एकपक्षीय कार्यवाही होने से दुधवा के वन तथा वन्यजीवों पर संकट

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एकपक्षीय कार्यवाही होने से दुधवा के वन तथा वन्यजीवों पर संकट
लखीमपुर खीरी-वनकर्मियों की मिलीभगत के बगैर दुधवा नेशनल पार्क में शिकारियों तथा वनमाफ़ियायों का एकक्षत्र राज नही चल सकता उनके आरे की धार और शिकार का तरीका वन विभाग बताता है,ऐसा लोगों का मानना है।वन विभाग अपनी नाकामी को छिपाने के लिए गाहे-बगाहे साल में एक-आध लोगों को भले ही शिकार व लकड़ी कटान में जेल भेजकर वाहवाही लूट लेता हो लेकिन हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है।लोगों का मानना है कि वन विभाग द्वारा शिकारियों तथा वनमाफ़ियायों को पकड़ने तथा उनसे बरामदगी मामले में की जा रही एकतरफा कार्यवाही से वन तथा वन्यजीवों की जान को खतरा बढ़ता ही जा रहा है।
आखिर क्या कारण है कि पार्क प्रशासन वनकर्मियों तथा वनमाफियाओं की मिलीभगत पर वनकर्मियों पर कोई ठोस कार्यवाही क्यों नही करता जिस कारण उनके हौसले बुलंद होने से उनका एकक्षत्र राज दुधवा टाइगर रिजर्व के वन तथा वन्यजीवों के कुनबे को खत्म करता जा रहा है।
बीते शुक्रवार को दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज के अंतर्गत आने वाले कुशाही गांव में वनमाफ़िया रमेश वर्मा के घर पर दुधवा उपनिदेशक मनोज कुमार सोनकर ने बेलरायां रेंज के वनकर्मियों को बगैर बताए छपामार कार्यवाही कर लाखों कीमत की सांखू,सागौन का चिरान तथा गोल लकड़ी व उसमें उपयुक्त होने वाले औजार बरामद कर तहलका मचा दिया था,अब सवाल उठता है कि बेलरायां रेंज के वनकर्मियों की जानकारी के बगैर उनके क्षेत्र में कार्यवाही में लाखों की चिरान व गोल लकड़ी बरामद कर उनकी संलिप्तता को उजागर करते हुए भी वनमाफ़िया रमेश वर्मा पर ही एकतरफा कार्यवाही की बेलरायां रेंज के वनकर्मियों पर कार्यवाही का न होना उपनिदेशक दुधवा टाइगर रिजर्व को भी सवालों के घेरे में लाता है।उपनिदेशक की कार्यवाही से ऐसा मालूम होता है कि अगर बेलरायां रेंज के वनकर्मियों की जानकारी में रमेश वर्मा के यहाँ छापेमारी की सूचना होती तो वहां कुछ नही मिलता इसीलिए उपनिदेशक दुधवा ने उनको बताए बग़ैर कार्यवाही को अंजाम दिया और ऑपरेशन भी कामयाब हुआ,साथ ही लोगों का आरोप है कि जंगल मे आग लगती नही पेड़ो के अवैध कटान को छिपाने के लिए मुडडियों को जलाया जाता है इसके साथ ही जंगल मे मछली के शिकार के साथ ही कच्ची शराब की भट्ठियां भी धधकती है जिससे वन विभाग को अच्छी कमाई की सूचनाएं भी मिल रही है पैसा न मिलने पर ही दारू बनाने वालों तथा मछली के शिकारियों पर कार्यवाही वन विभाग करता है ।वन प्रशासन ईमानदारी से जांच कराए तो जंगल कटान से लेकर दारू की भट्ठियां तथा मछली के शिकारियों से वन कर्मियों की मिली भगत सामने आ जायेगी।
वन तथा वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि इसी तरह वनकर्मियों को वनविभाग के उच्चाधिकारी कार्यवाही से बचाते रहे तो आने वाले दिनों में दुधवा के वन तथा वन्यजीवों का नामोनिशान तक मिट जाएगा जो बहुत ही चिंताजनक बात है बहुत जल्द वन तथा वन्यजीव प्रेमियों का एक दल सांसद अजय मिश्र उर्फ टेनी से मिलकर वस्तु स्थित से अवगत कराते हुए वनमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन देगा।

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