रुली अहमद – ट्रू वौइस् ऑफ़ नार्थ ईस्ट

    रुली अहमद - ट्रू वौइस् ऑफ़ नार्थ ईस्ट

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    बिपिन शर्मा, सीनियर एडिटर।

    उद्यमी रुली अहमद ने अपने तीन दशक के शानदार कैरियर में कई चुनौतियों पर विजय प्राप्त की है। उत्तर पूर्व की पहली महिला शिप बिल्डर के रूप में, वह वास्तव में पूरे देश में अनगिनत महिलाओं के लिए एक प्रतीक और प्रेरणा है। उन्होंने एक तरफ जहाँ अपनी शिपिंग कंपनी “रेलेमेक एंटरटेनमेंट कंपनी” की स्थापना की वहीँ दूसरी तरफ “कामकाज़ी” नामक फ़्लोटिंग डिस्कोथेक का भी सफलता पूर्वक संचालन किया।
    उन्होंने अपने सभी व्यवसायों में असाधारण सफलता हासिल की लेकिन उनके मन में हमेशा से उत्तर पूर्व राज्यों के युवाओं के लिए कुछ करने की चाह थी , वह उन युवा प्रतिभाओं को एक मंच देना चाहती थी जो साधनों और उचित मर्गदर्शन के आभाव में आगे नहीं बढ़ पाते।
    अपने अंतर्मन की इसी आवाज़ के चलते रुली अहमद ने “द वौइस् ऑफ़ द नार्थ ईस्ट” नाम से एक म्यूजिकल रियलिटी शो की शुरुआत की है ताकि उत्तर पूर्व और उत्तरी बंगाल के 15 – 30 आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को एक मजबूत मंच प्रदान कर सकें।

    अपने आने वाले शो के बारे मैं बात करते हुए रुली अहमद ने बताया की उनकी दोनों कम्पनियां “रेलेमेक एंटरटेनमेंट कंपनी” और “कामकाज़ी” इस शो को होस्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और यह शो उत्तरी बंगाल और उत्तर पूर्व के राज्यों में छिपी प्रतिभाओं को आगे लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा की “संगीत की सच्ची सुंदरता और सार यह है कि यह लोगों को प्यार, सद्भाव और शांति के अग्रदूत से जोड़ने में मदद करता है।” उन्होंने कहा की इन कलाकारों के पास एक संदेश है कि शेष राष्ट्र को सुनने की जरूरत है, और वॉयस एक मंच है जो इसे संगीत के लिए प्यार के माध्यम से आगे ले जाएगा। रुली ने कहा की जब वह पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण निराश युवाओं को शराब और नशेकी लत में घिरते हुए देखती है तो उन्हें बहुत दुःख होता है अब पाने इस प्रयास से वह जरूर युवाओं को एक नयी दिशा देने में अपना योगदान दे पाएंगी। उन्होंने कहा की मेरा सपना न केवल उभरती प्रतिभाओं के लिए एक मजबूत मंच प्रदान करना है, बल्कि देश के मुख्यधारा के लोगों के साथ हमारे लोगों को एकीकृत करने के लिए भी है। उन्होंने कहा की उन्हें पूरा भरोसा है की इस मंच के माध्यम से न केवल कई नई प्रतिभाओं को सफलता के आकाश में पंख फ़ैलाने के अवसर मिलेंगे बल्कि वर्षों से जो भेदभाव नार्थ ईस्ट राज्यों के साथ होता आया है वह भी कुछ काम होगा।

    शो के बारे मैं अधिक जानकारी सांझा करते हुए उन्होंने बताया की इस शो के ब्रांड एंबेसडर प्रसिद्ध स्टार गायक जुबिन गर्ग हैं जो की लाखों लोगों की दिलों की धड़कन हैं जबकि जूरी में भी बॉलीवुड की कई प्रसिद्ध हस्तियों के साथ उषा उथुप जैसे नाम हैं। इस शो की अवधारणाकार और निर्माता मैं हूं और प्रियम साहा शो के निदेशक हैं। यह शो हर रविवार को 9 बजे से 10 बजे तक प्रोटीडिन टाइम के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। दोनों ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन पत्र उपलब्ध हैं। अधिक जानने के लिए कोई भी www.voiceofnortheast.in पर लॉग ऑन कर सकता है। “द वॉयस ऑफ द नॉर्थ ईस्ट” का थीम गीत मेरी बेटी अफ्रिन ताराना ने गाया है। ”
    आफरीन तराना ने भी कहा की ” नार्थ ईस्ट के राज्य भारत में उगते सूर्य की भूमि है और यहाँ की सांस्कृतिक , भाषा और कला की विवधता को अपने मैं समेटे हुयी है। उन्हों कहा की नार्थ ईस्ट ने देश को कई उपलब्धियां , खिलाडी और मेरी कॉम जैसी महिलायें दी हैं लेकिन अभी भी भारत की मुख्य धरा से यहाँ के राज्य कटे हुए है और यहाँ के लोगों को अपने ही देश मैं एलियंस की तरह देखा जाता है जो की बहुत दुःख की बात है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा की वहां के लोगों मैं भी जो एक चीज़ सबको जोढ़तीहै वो है संगीत के लिए सबका प्यारऔर जूनून। संगीत एक शक्तिशाली गोंद की तरह है जो लोगों को उनकी सांस्कृतिक विविधता,भाषा, जाति, पंथ, या लिंग के बावजूद भी जोड़े रखता है। वॉयस ऑफ नॉर्थ ईस्ट इस क्षेत्र को समर्पित सबसे बड़ी संगीत प्रतिभा तलाशने का मंच बनने जा रहा है। इस शो मं अब तक 30,000 लोग आवेदन कर चुके हैं और यह संख्या दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। इसलिए वह और उनकी टीम एक ऐसे कार्यक्रम का निर्माण करने के लिए प्रयासरत हैं जो न केवल कलाकारों को मंच प्रदान करेगा , बल्कि उन्होंने एक चैरिटेबल ट्रस्ट भी बनाया है जो गरीब बच्चों को खेल और शिक्षा में भी सहायता प्रदान करेगा ।

    इसका पहला ऑडिशन अगले महीने 27 सितंबर को होगा जहाँ से जज इसे आगे ले जाएंगे। हमारे पास राज्य, उद्योग सहायता, और फिर खेल और शिक्षा चैरिटी सहयोग से समर्थन है। इस पहल का समर्थन करने के लिए, पूरे दिल्ली एनसीआर के 200 से अधिक हैपकिडो खिलाड़ियों और टीमों ने तेजपुर में 5 वीं से 7 अक्टूबर तक अपने कौशल का प्रदर्शन करने के लिए तैयार किया है। 7 वीं हैपकिडो नेशनल के लिए स्टेडियम, आवास और यात्रा सहित सभी व्यवस्थाएं आयोजित की गई हैं, और खिलाड़ियों के बीच ऊर्जा पर विश्वास किया जाना चाहिए। ”

    सोशल थिंकर और फिलैथ्रोपिस्ट प्रद्युम्ना बारबोरा ने कहा, “चाय बागान एकमात्र प्लस नहीं हैं जो उत्तर पूर्व का दावा करते हैं, बल्कि यहाँ सांस्कृतिक और कलात्मक रूप से पेशकश करने के लिए बहुत कुछ है। प्राकृतिक सुंदरता की इस भूमि में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, न केवल पारंपरिक संगीत और लोक नृत्य की पूरी तरह से अलग दुनिया की पेशकश करता है, बल्कि यह रॉक और पॉप संगीत के प्रमुख उद्योगों में से एक के रूप में उभरा है। टेटसीओ बहनों से लेकर दिव्य कनेक्शन तक, बैंगनी फ्यूजन से, इम्फाल टॉकीज और हाउलर्स तक, इन उत्तर पूर्वी बैंडों में दुनिया अपनी धुनों पर नृत्य कर रही है। इतना ही नहीं, उनका संगीत एक संदेश फैलाता है जिसे हम एक समाज के रूप में कहीं भी याद करते हैं। संगीत 7 राज्यों और राष्ट्र भर में अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध की भावना का प्रतीक है, लेकिन यह शांति और सद्भाव में किया जाता है, जिस तरह से इसे होना चाहिए। वॉयस ऑफ द नॉर्थ ईस्ट अभियान पूरे देश के लिए एक वाटरशेड पल होने जा रहा है। उत्तर पूर्व से युवा प्रतिभा को सशक्त बनाने के इस मिशन के लिए रुली अहमद जे जज्बे को हम सलाम करते हैं। ये अथक प्रयास निश्चित रूप से आने वाले समय में राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ”

    एक प्रमुख सामाजिक उद्यमी महिमा गिरधर कहते हैं, “संगीत के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करने के अलावा, हम कार्यशालाएं आयोजित करेंगे, और पिरामिड के नीचे बच्चों को अपनी संगीत पहचान और नियतियां बनाने के लिए सक्षम करेंगे। प्रतिभा को कोई सीमा नहीं है और न ही यह आपकी वित्तीय स्थिति के आधार पर भिन्न होती है; इन बच्चों को एक खुला मंच मिलेगा और प्रसिद्ध हस्तियों से लेकर कई कलाकारों तक से नेतृत्व मैं इनकी प्रतिभा और निखरेगी। सिर्फ इतना ही नहीं नार्थ ईस्ट क्षेत्र को धन्यवाद के रूप मैं द वॉयस एक और मंच भी लाएगा जो मुकाबला खेल, करियर परामर्श, परामर्श, छात्रवृत्ति, और विभिन्न के मामले में बच्चों के लिए खेल और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करेगा जिसमें द वॉयस एक मंच के साथ भी लाएगा जो मुकाबला खेल, करियर परामर्श, परामर्श, छात्रवृत्ति, और विभिन्न के मामले में बच्चों के लिए खेल और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान करेगा और (संचार, प्रस्तुति, लोक बोलना, नेतृत्व, स्वास्थ्य और पोषण, आतिथ्य, और कई अन्य) विषयों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जायेगी । ”

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