भारत ने जमीनी स्तर पर चीन की कमर तोड़ने का काम शुरु किया 

1
551
भारत ने जमीनी स्तर पर चीन की कमर तोड़ने का काम शुरु किया 
रजनी पंवार, दिल्ली, 22 जुलाई। सीमा पर जवान… चर्चा में रणनीतिकार और कारोबारियों ने बाज़ार में चीन की कमर तोड़ने का काम शुरु कर दिया है। चीन को चारों खाने चित्त करने के लिए हर भारतीय कमर कसकर तैयार है। बीते कई हफ्तों से एक के बाद देश की कई दिग्गज कंपनियां चीन को दिए गए ऑर्डर कैंसिल करने में लगी हैं। पिछले दिनों में भारत की
-इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने चीनी कंपनियों के ऑर्डर को बड़े लेवल पर कैंसिल करना शुरू कर दिया है।
-अब इन ऑर्डर के लिए ये कंपनियां नए ठिकानों की तलाश करने में जुट गई हैं।
-ये कंपनियां पावर डिस्ट्रिब्यूशन और ट्रांसमिशन गियर के ऑर्डर कैंसिल कर रही हैं और दूसरे देशों से ज्यादा कीमत होने के बावजूद ये सारे सामान मंगा रही हैं।
इसकी शुरुआत मई से हुई है जब से पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल का एलान किया था। इस महीने पावर गियर के आयात पर लगे तमाम प्रतिबंधों के चलते इस मुहिम को और बल मिला है। लेकिन इंडस्ट्री ये भी तय कर लेना चाहती है कि इसकी वजह से सप्लाई ना रुके।
Indian Electrical & Electronics Manufacturers Association यानी IEEMA के मुताबिक
-अब तक इंडस्ट्री में कच्चा माल, असेंबली का सामान और काफी सारा बना बनाया सामान चीन से मंगाया जाता था।
-लेकिन अब ये इंडस्ट्री विकल्प तलाश रही है जिससे चीन से सामान की सप्लाई को रोका जा सके।
दरअसल, आत्मनिर्भर भारत की इस मुहिम का रास्ता तो लंबा है लेकिन इसके बहाने चीन से रिश्ता बनाए रखने को भी ये कंपनियां तैयार नहीं है। ऐसे में
-जापान, ताइवान, कोरिया और जर्मनी का रुख करने पर कंपनियां विचार कर रही हैं
-सॉफ्टवेयर के आयात के लिए यूरोप पर भरोसे किया जा सकता है
-कच्चे माल के लिए रूस, चेक रिपब्लिक या पोलैंड शिफ्ट करने के लिए भी कंपनियां तैयार हैं
IEEMA के सदस्यों ने दूसरे देशों का रुख करना भी शुरू कर दिया है।
इसके पहले भी कई बड़ी कंपनियों ने चीन को झटका दिया था। इनमें
-हीरो साइकल्स ने चीन से 900 करोड़ रुपये के ऑर्डर को रद्द किया
-अलीगढ़ के ताला कारोबारियों ने 100 करोड़ रुपए के इस उद्योग की चीन पर निर्भरता खत्म करने और स्वदेशी अपनाने का एलान किया था
-सरकारी कंपनी EESL ने चीनी मूल की एक कंपनी को दिए गए 20 लाख स्मार्ट मीटर के आर्डर को होल्ड पर डाल दिया
-बीएसएनएल और एमटीएनएल तो पहले ही 4G टेंडर रद्द कर चुकी हैं
-एयरटेल भी अपने 2 सर्किलों से हुवावे को बेदखल कर सकती है
यानी व्यापारी हों या कारोबारी सब लोग सैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए सीमा के रण की एक चाल अपने अपने क्षेत्रों में रहकर भी चल रहे हैं।

1 टिप्पणी

कोई जवाब दें