बैंकिंग सेक्टर बना देश की ग्रोथ स्पीड पर ब्रेक लगाने वाला विलेन 

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बैंकिंग सेक्टर बना देश की ग्रोथ स्पीड पर ब्रेक लगाने वाला विलेन 
नई दिल्ली , 25 जुलाई।
देश की ग्रोथ स्टोरी की स्पीड पर ब्रेक लगाने वाला विलेन कौन है.. इसका खुलासा मुख्य आर्थिक सलाहकार ने किया है। CEA… K सुब्रमणयन के मुताबिक देश में मौजूदा आर्थिक सुस्ती का जिम्मेदार बैंकिंग सेक्टर है। मुख्य आर्थिक सलाहकार के मुताबिक देश की अर्थव्यवस्था एक चक्रव्यूह में फंसी है जिसकी वजह बैंकिंग एग्जिक्यूटिव्स के लिए गए फैसले हैं।
अपने दावे को साबित करने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उन वजहों का सिलसिलेवार जिक्र किया जिसकी वजह से बैंकिंग सेक्टर ने देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है।
सुब्रमणयन के मुताबिक बैंकों के बढ़ते
-NPA, जोखिम ना लेने की आदत और कारोबारियों को कर्ज ना देने से निवेश कमजोर हुआ है
-इसके चलते आर्थिक कमजोरी आई और खपत में कमी दर्ज की गई
-जनधन खातों में 20 हज़ार करोड़ की बढ़ोतरी का हवाला देकर CEA ने बचत की तरफ लोगों के बढ़े रुझान की वजह बताया
-खपत घटने से निवेश में फिर और कमी आ गई
इसके साथ ही मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारतीय बैंकों की आर्थिक हालत को भी देश की ग्रोथ स्टोरी में बड़ी भूमिका ना निभाने का दोषी ठहराया। सुब्रमणयन के मुताबिक
-दुनिया के टॉप 100 बैंकों की लिस्ट में केवल 1 भारतीय बैंक यानी SBI है
-वहीं इस लिस्ट में चीन के 18, अमेरिका के 12 बैंक हैं
-यहां तक की भारत के मुकाबले बेहद छोटे देश, स्विट्ज़रलैंड, स्वीडन और सिंगापुर के बैंकिंग सेक्टर की हालत भारत से कहीं बेहतर है
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने साफ कहा कि कोई भी अर्थव्यवस्था तभी बड़ी बन सकती है जब उसके बैंकिंग सेक्टर में बड़े बैंकों का बोलबाला हो। इस मामले में भारत बाकी मुल्कों से काफी पीछे है।
अक्सर आकार बढ़ाने की कोशिश में बैंक बगैर सोचे समझे कर्ज बांटकर एनपीए बढ़ा लेते हैं जो उनके लिए और फिर अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित होता है। बैंकों की हालत सुधारने के लिए सुब्रमणयन ने डेटा और तकनीक के इस्तेमाल से सही जगह लोन बांटने की वकालत की है। उनका कहना है कि जिस तरह से FMCG कंपनियां महंगे प्रॉडक्ट्स को छोटे पैक के ज़रिए कम कीमत में बेचते हैं उसी तरह बैंकों को भी क्वालिटी कर्ज बांटने के लिए लोन की संख्या बढ़ानी होगी।
इसके लिए कम रकम के कर्ज ज्यादा लोगों और कंपनियों को दिए जाएं लेकिन ये परखने के बाद कि ये लोन डूबेंगे नहीं।

 

2 टिप्पणी

  1. सही बात है ।लोन छोटे छोटे भी देने चाहिए और ग्राहक को सुविधा भी और लोन पर कम ब्याज पर देना चाहिए ।यही हाल चलता रहा तो बरबादी पक्की है ।

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