अस्थि कलश यात्रा से चुनावी सफलता की तैयारी : डॉ. कविता सारस्वत

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    अटल बिहारी वाजपेयी के रूप में पूरे देश ने एक बड़ा नेता खो दिया है। अटल जी न केवल बीजेपी के वरन देश के बड़े नेता माने जाते थे। ज्यादातर दलों में उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। जन जन के बीच वे लोकप्रिय थे। उनकी यही लोकप्रियता अब बीजेपी के काम आने वाली है। बीजेपी ने वाजपेयी के अस्थि कलश लेकर पूरे देश में जाने की जो योजना बनायी है उसके मूल में भी यही वजह मानी जा रही है। उनके निधन के बाद अस्थि कलश यात्रा के नाम पर पार्टी अपनी राजनीति को चमकाने की कोशिश में लग गयी है।

    पार्टी ने अटल जी की अंतिम यात्रा का जिस भव्य तरीके से आयोजन किया, उससे देश के बड़े तबके को भावनात्मक रूप से जोड़ने में उसे कामयाबी मिली। अब उनके अस्थि कलश को लेकर पूरे देश में जाने और उन्हें देश की तमाम नदियों में प्रवाहित करने के लिए उसने जो योजना बनायी है, वह निश्चय ही पार्टी की को एक नयी शक्ति दे सकती है। माना जा रहा है कि 1991 में जिस तरह कांग्रेस ने स्वर्गीय राजीव गांधी के अस्थि कलश को पूरे देश में घुमाकर सहानुभूति लहर पैदा करने की कोशिश की थी, वैसी ही लहर अब अटल जी के अस्थि कलश के जरिये भी बनायी जा सकती है। यहां ये याद रखना चाहिए कि राजीव गांधी की अस्थि कलश यात्रा का तब के लोकसभा चुनाव पर काफी असर पड़ा था और उनकी हत्या के बाद के चरणों में हुए चुनाव में कांग्रेस को तुलनात्मक रूप से ज्यादा सीटें मिली थीं।

    बीजेपी ने फिलहाल देशभर के तमाम जिलों में उनके अस्थि कलशों को ले जाने की योजना बनायी है, ताकि लोग उनकी अस्थियों का दर्शन करें। अस्थियों के दर्शन के बाद उन्हें स्थानीय नदियों में प्रवाहित किया जायेगा। विश्लेषकों का मानना है कि अपने इस कार्यक्रम के जरिये बीजेपी बड़ी संख्या में देशवासियों को जोड़ने में सफल होगी। आने वाले कुछ दिनों में चार राज्यों के विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन चार राज्यों में से राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश बीजेपी के लिए काफी अहम हैं। पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव के पहले हर हालत में इन तीनों राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करना चाहती है, ताकि उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में वह बढ़े हुए मनोबल के साथ जनता के सामने जा सके।

    इन तीनों ही राज्यों में अटल बिहारी वाजपेयी का काफी असर रहा है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से तो अटल बिहारी वाजपेयी करीब से जुड़े रहे हैं। मध्यप्रदेश के हर जिले में अटल बिहारी वाजपेयी का प्रत्यक्ष संपर्क रहा है। ग्वालियर उनका कार्यक्षेत्र भी रहा है। जनसंघ के जमाने में उन्होंने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के हर जिलों में अपने व्यक्तिगत संपर्क कायम किये थे। इस नाते राज्य के चप्पे-चप्पे से उनकी स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। जब इन जिलों में अटल जी की अस्थियों को लोगों के दर्शनार्थ रखा जायेगा और बाद में पूरे विधि-विधान से उन जिलों की नदियों में अस्थियों का विसर्जन होगा, तो स्वाभाविक रूप से आम लोग भावनात्मक रूप से बीजेपी के साथ जुड़ सकेंगे।

    माना जा रहा है कि पार्टी राज्य के हर जिलों में अटल जी की अस्थियों का कलश लेकर जायेगी और इस माध्यम से छोटे बड़े हर व्यक्ति को जोड़ने की कोशिश करेगी। अटल जी की अस्थि कलश यात्रा के दौरान हर जिलों में उनको श्रद्धांजलि देने के लिए सभाओं का आयोजन किया जायेगा। साथ ही पार्टी के जिला मुख्यालयों के अलावा जिले के अन्य हिस्सों में भी अटल जी की याद में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। अपने जीवन में अटल बिहारी वाजपेयी एक राजनीतिज्ञ होने के साथ ही साहित्यकार भी रहे हैं। उनके जीवन का एक पक्ष कवि और पत्रकार का भी रहा है। पार्टी इन श्रद्धांजलि सभाओं में कवि सम्मेलनों का आयोजन करने की भी योजना बना रही है।

    कहने का मतलब यही है कि बीजेपी ने अपनी ओर से अटल जी के नाम पर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर ली है। अभी तक सिर्फ विकास के दम पर चुनाव लड़ने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी को अटल जी के नाम का सहारा मिलना लगभग तय हो गया है। वाजपेयी जी का सम्मान उनके विरोधी भी करते रहे हैं। और तो और अल्पसंख्यक समुदाय में भी अटल जी के प्रति हमेशा ही सम्मान की भावना बनी रही है। ऐसे में अगर उनकी अस्थि कलश यात्रा बीजेपी की चुनावी यात्रा का भी काम कर जाये, तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

    राजनीति के जानकारों का मानना है कि बीजेपी का इरादा भी यही करने का है। पार्टी के नेता जहां अटल जी को श्रद्धांजलि देंगे, उनका गुणगान करेंगे और उन्हें देश का सबसे बड़ा सपूत बता कर लोगों को अपने साथ जोड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर धुआंधार तरीके से विकास कार्यक्रमों को सामने रखकर मतदाताओं को अपने पक्ष में प्रभावित करने की भी कोशिश की जायेगी। विश्लेषकों का मानना है कि अगर पूरी योजना बनाकर पार्टी अस्थि कलश यात्राओं का ढंग से आयोजन कर पाने में सफल रही तो, हिन्दी भाषी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ ही राजस्थान के विधानसभा चुनावों में उसको इसका काफी लाभ मिल सकता है।

    ऐसे भी छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में कांग्रेस और बीजेपी के बीच हमेशा ही कांटे की टक्कर होती रही है। कुछ प्रतिशत वोटों के अंतर से सरकार बनने या गिरने की बात तय होती है। कुछ दिन पहले ही एक निजी चैनल द्वारा कराए गये ओपिनियन पोल में भी इन दोनों ही राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर का अनुमान जताया गया है। हालांकि इन दोनों ही राज्यों में फिलहाल कांग्रेस को बढ़त मिलने की बात कही गयी है, लेकिन दोनों ही जगहों पर टक्कर लगभग बराबर की है। ऐसे में अगर अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थि कलश यात्रा की योजना सफल रही, तो बीजेपी एक बार फिर बढ़त बनाने में कामयाब हो सकती है। और अगर ऐसा हुआ तो यह 2019 के चुनाव के पहले पार्टी के मनोबल को बढ़ाने वाला एक अहम कदम होगा।

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